बिलासपुर: तोरवा सामूहिक दुष्कर्म मामले पर कोर्ट ने दोषियों को सुनाई 30-30 साल की सजा

छत्तीसगढ़ : तोरवा के बहुचर्चित गैंगरेप मामले में बिलासपुर पॉक्सो कोर्ट ने दुष्कर्म का आरोप पाते हुए सभी चारों दरिंदों को 30-30 साल की सजा सुनाई है। आरोपियों की सभी दलीलों को कोर्ट ने खारिज कर दिया। तोरवा थाना क्षेत्र में नाबालिग की शिकायत पर 2017 में सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। तोरवा थाने में 13 साल की बालिका ने 2015 से उसे डरा धमका कर उसके साथ समीपस्थ शराब भट्टी में कार्यरत चार लोगों पर लगातार अनाचार करने का एफआईआर दर्ज कराया था।

आरोपियों ने उसकी धोखे से अश्लील वीडियो भी बनाया था जिसे वे सार्वजनिक करने की धमकी देते थे। पीड़िता के साथ जब यह घटना पहली बार हुई तब वो दस वर्ष की थी। घटना की रिपोर्ट 20 फरवरी 2017 को दर्ज की गई थी, तोरवा थाने ने आरोपियों के खिलाफ धारा 376 (घ) और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया था।

साथ ही मामले के दो आरोपियों चरण सिंह चौहान और ईश्वर ध्रुव 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया था। जबकि एक अन्य फेंकू उर्फ नागेश्वर रजक को 23 फरवरी को गिरफ्तार किया। इस पूरे प्रकरण के प्रमुख आरोपी मनोज वाडेकर को गिरफ्तार करने में पुलिस को एक माह लग गए। आरोपी को 22 मार्च को गिरफ्तार किया गया। मामले में सुनवाई के बाद बिलासपुर के पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश संजीव कुमार तामक ने मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाया। सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने सभी को 30-30 वर्ष कारावास की सजा सुनाई।

सभी आरोपी देवरीखुर्द के रहने वाले
चरण सिंह 30 साल देवरीखुर्द 376(2)द में 25 साल सश्रम कारावास और धारा 376 (घ) में 30 साल दोनों मामले में जुर्माना, ईश्वर ध्रुव 31 साल देवरीखुर्द 376(घ) 30 साल सश्रम कारावास जुर्माना, फेंकू उर्फ नागेश्वर रजक 26 साल देवरीखुर्द 376 (घ) 30 साल का सश्रम कारावास जुर्माना, मनोज वाडेकर 35 साल 376(घ) 30 साल का सश्रम कारावास जुर्माना दिया गया।

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