भूपेश बघेल / कांग्रेस सरकार का दूसरा साल आर्थिक विकास और युवाओ पर होगा फोकस , मितव्ययता के साथ विकास की दिशा में बढ़ रहे है

 

 

छत्तीसगढ़ : भूपेश सरकार का पहला साल गांव,गरीब और किसानों के नाम रहा। अब सरकार का दूसरा साल में राज्य के आर्थिक विकास और युवाओ  के रोजगार पर फोकस होगा। सीएम बघेल ने कहा हम एक साल में मितव्ययता के साथ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बघेल ने यह भी कहा कि अभी आचार संहिता है। 25 दिसंबर को राजधानी में सरकार एक साल पूरा होने का जश्न भव्य तरीके से मनाया जाएगा।

राजीव भवन में सीएम बघेल ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर यही बात कहते थे कि हर वर्ग को लगना चाहिए कि यह उसकी सरकार है। ओर आज इस बात की खुशी है कि हर वर्ग के लोगों को लगता है कि आज यह सरकार उसकी सरकार है। इसलिए हमारी योजनाएं भी आमजनता से जुड़ी है इसलिए सभी काम आसानी से हो रहे हैं।सभा को वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, धनेन्द्र साहू, गुरु रुद्रकुमार ने भी संबोधित किया।

राजीव भवन में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद नेता कुछ ढूंढ़ते नजर आए। बाद में नेताओं ने ही बताया कि वे एक मंत्री को जाने के लिए रास्ता देने खड़े हुए थे।

बघेल कई बार भूल जाते हैं कि वह सीएम हैं: अकबर

वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि प्रदेशअध्यक्ष के रुप में भूपेश बघेल जिस तरह लोगों से मिलते रहे हैं वो सहजता आज भी कायम है। लोग उनसे ऐसे मिलते हैं तो वे भूल जाते हैं कि वे किसी सीएम से मिल रहे हैं। वैसे ही सीएम बघेल जब लोगों के बीच जाते हैं तो कई बार वे भी भूल जाते हैं कि वो एक सीएम हैं। वही सहजता आज भी उन्होंने कायम रखा है।

कई चुनौतियां बाकी हैं : सिंहदेव

पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि एक साल में हमने बहुत कुछ हासिल कर लिया है। लेकिन हमारे सामने अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। उनका सामना करने हम सभी सीएम बघेल के साथ हैं। उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि राज्य के विकास में हम उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन ने बताया कि बाबा घासीदास जयंती भूपेश बघेल के लिए काफी सुखद संयोग से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि घासीदास जयंती के एक दिन बाद यानि 19 दिसंबर को भूपेश बघेल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे आैर घासीदास की जयंती के एक दिन पहले यानि 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

रघुवर भी प्रमाणित नहीं कर पाएंगे

सीएम ने कहा,एनआरसी लागू होगा तो सबसे पहला व्यक्ति मैं रहूंगा जो दस्तखत नहीं करेगा और विरोध करेगा। पूरे देश में सविनय अवज्ञा आंदोलन उसी दिन से चालू करेंगे। जिनके पुरखे पढ़े-लिखे नहीं है, वह कैसे साबित करेंगे? लोगों के जिले बदले, प्रदेश बदले। उन्होंने झारखंड में मुख्यमंत्री रघुवर दास काे लेकर भी सवाल किया कि उनके पास गांव-घर-जमीन-खेत नहीं है। वे कैसे प्रमाणित करेंगे। बघेल ने कहा देश गांधी जी की 185वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में इसका विरोध किया था।

6 साल में हिंदुओं के लिए क्या किया

बघेल ने मोदी के कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वे बड़े हिंदुवादी नेता बनते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि वे हिंदुवादी नेता हैं तो बताएं कि अपने 6 साल के कार्यकाल में किसी भी हिंदू समाज या संगठन के लिए कोई एक काम किये हैं क्या? या कोई योजना लेकर आएं तों बता दें।

परिवार भक्ति का दस्तावेज: सुंदरानी

इधर, पूर्व विधायक श्रीचंद सुन्दरानी ने नगरीय निकाय के लिए जारी कांग्रेस के शहरी जनघोषणा पत्र को महज परिवार-भक्ति का दस्तावेज बताया है। उन्होंने कहा कि खानदान-भक्त प्रदेश के कांग्रेस नेताओं की विचारहीनता इस घोषणा पत्र में साफ नजर आ रही है।

प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय किए गए वादों से मुकरकर प्रदेश को बदहाली की ओर धकेलने वाली कांग्रेस के पास तो अब घोषणा पत्र जारी करने की नैतिकता ही नहीं रह गई थी। जिन लोगों ने गंगाजल हाथ में लेकर कसमें खाने के बावजूद छलावा-ठगी-झूठ फैलाकर वादाखिलाफी का राजनीतिक चरित्र प्रदर्शित किया है, वे उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि प्रदेश के निकाय चुनावों में लोग उनकी बातों पर भरोसा कर लेंगे? उन्होंने ने कहा कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ा करती, यह सामान्य-सी समझ कांग्रेस नेताओं को यह घोषणा पत्र जारी करने से पहले अपने भीतर विकसित कर लेनी थी। कांग्रेस के पास तो नीयत, नीति और नेतृत्व है ही नहीं। यह विचारहीनता व दृष्टिकोण का अभाव कांग्रेस के इस नए घोषणा पत्र में साफ दिखाई दे रहा है। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जिस तरह का अलोकतांत्रिक आचरण प्रस्तुत किया है, वह भी कांग्रेस के दोहरे चरित्र को रेखांकित करता है और निकाय चुनावों में कांग्रेस को अपने किए की सजा के लिए तैयार हो जाना चाहिए जो प्रदेशभर के मतदाता उसे देने जा रहे हैं।

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