बस्तर / पढ़ने जाने, राशन लाने और बीमार को अस्पताल पहुंचाने के लिए 250 से ज्यादा लोगों को इसी रास्ते का सहारा

नकुलनार : बस्तर संभाग में विकास के दावों के बीच लोकतंत्र की ये तस्वीर 250 से ज्यादा लोगों के पीड़ा की गवाह है। नकुलनार ब्लाॅक के ग्राम पंचायत गामावाड़ा से मिडकोपारा के बीच पड़ने वाले झारालावा नाले पर पुलिया नहीं होने से तार के कथित पुल से आना-जाना करना पड़ता है। इस खतरे को ऐसे भी समझा जा सकता है कि गांव की एक महिला भीमे की मौत 2 साल पहले तार पुलिया से गिरकर हो चुकी है।

पुलिया की मांग यहां के 34 परिवार के करीब 250 से 300 लाेग कई सालों से कर रहे हैं लेकिन ग्रामीणों की यह मांग पूरी नहीं हो रही है। मिडकोपारा ग्राम पंचयात गामावाड़ा से 4 किलोमीटर दूर है। ये मिडकोपारा बैलाडीला जाने वाली मुख्य सड़क से 3 किमी अंदर बसा है। यहां पहुंचने के लिए बस यही तार का पुल ही एकमात्र जरिया है क्योंकि िमडकोपारा के पीछे सिर्फ और सिर्फ बैलाडीला की ऊंची-ऊंची पहाड़ियां हैं। ऐसे में यहां तक जाने के लिए न ताे सड़क है अाैर न ही पक्की पुलिया है। बारिश में यहां रहने वाले परिवार सरकारी राशन सहित दूसरी जरूरत नाले पर तार की पुलिया से आना-जाना करते हैं। शिक्षक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी इसी रास्ते से मिडकोपारा तक पहुंचते है। मिडकोपारा के गुडू, लक्खो, जग्गू भास्कर ने बताया झारालावा नाले पर पुलिया निर्माण की मांग प्रशासन से करीब 20 बार कर चुके हैं।

नक्सली डर से निकल कर अब ग्रामीण कर रहे मांग, प्रस्ताव भेजेंगे: सीईओ
सरपंच जया कश्यप का कहना है कि पहले भी कई बार लिखित में पूर्व कलेक्टर को 2017-2018 में पुलिया के लिए आवेदन दिया जा चुका है लेकिन काम नहीं हुआ। वहीं इस संबंध में दंतेवाड़ा जनपद के सीईओ अमित भाटिया ने बताया कि झारालावा नाले पर पुलिया स्वीकृत नहीं है। प्रस्ताव भेजेंगे। हर बार यहां नक्सली दहशत की बात बताई जाती थी। गांव वालों की तरफ से अब ग्रामीण पुलिया की मांग खुल कर कर रहें है।